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खान सर पटना वाले पटना के नहीं हैं ? जानिए क्यों हुआ उन पर FIR

खान सर को दुनिया एक ऐसे शिक्षक रूप में जानती है जिनका पढ़ाने का तरीका सबसे अलग और सरल है। बिहार के पटना में उनका कोचिंग सेंटर ‘खान जीएस रिसर्च सेंटर’ के नाम से है। उनके नाम को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा करते हैं कि उनका असली नाम अमित सिंह है। हालांकि, कुछ यह भी दावा करते हैं की उनका नाम फैसल खान है और वह उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले हैं।

पढ़ाने के अनूठे अंदाज़ के लिए मशहूर  शिक्षक और YouTubers ‘खान सर’ गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणी (NTPC) की नौकरी के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा प्रारूप के खिलाफ छात्र विरोध को भड़काने के आरोपों को लेकर विवादों में हैं। 

खान सर और 5 शिक्षकों के खिलाफ क्यों प्राथमिकी FIR दर्ज हुई ?

पटना बिहार में हाल में हुए छात्रों का हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ। यह विरोध प्रदर्शन आरआरबी-एनटीपीसी द्वारा आयोजित की गई परीक्षा के परिणामों को लेकर हुआ था।इस मामले में खान सर और पांच शिक्षकों के खिलाफ एक प्राथमिकी FIR दर्ज हुई है।

खान सर और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज पटना में सोमवार और मंगलवार को हिरासत में लिए गए आंदोलनकारी छात्रों के बयानों के आधार दर्ज की गई। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि वे एक वीडियो के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने लेने के लिए प्रेरित हुए जिसमें खान सर ने कथित तौर पर छात्रों को तब सड़कों पर आंदोलन करने के लिए उकसाया था, यदि आरआरबी एनटीपीसी परीक्षा रद्द नहीं की गई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।

प्राथमिकी FIR में कहा गया है कि, पुलिस को मिले बयानों और वीडियो क्लिप के आधार पर, यह स्पष्ट है कि ‘‘आंदोलनकारी छात्रों ने कोचिंग संस्थान के मालिकों के साथ मिलकर कानून और व्यवस्था को खतरे में डालने के लिए पटना में बड़े पैमाने पर हिंसा करने की साजिश रची।’’

नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों ने नयी दिल्ली-कोलकाता मुख्य रेलवे ट्रैक को अवरुद्ध कर दिया था और कुछ अन्य लोगों ने बिहार के आरा और शरीफ रेलवे स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन किया था। बिहार के आरा में सैकड़ों गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर एक ट्रेन में आग लगा दी थी।

क्या वाकई खान सर ने छात्रों को उकसाया था ?

सोमवार को हिंसा भड़कने के बाद, खान सर ने परोक्ष तौर पर एक वीडियो जारी किया था जिसमें छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन करने की अपील की गई। उन्होंने कहा कि यदि वे हिंसा की ओर मुड़े तो कोई उनका समर्थन नहीं करेगा। खान सर ने अन्य शिक्षकों के साथ बृहस्पतिवार को एक और वीडियो जारी किया और छात्रों से कहा कि विरोध करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पहले ही आश्वासन दिया है कि ग्रुप डी पदों के लिए आवेदन करने वालों के लिए कोई दूसरी परीक्षा नहीं होगी और आरआरबी एनटीपीसी-सीबीटी-I के परिणाम भी संशोधित किए जाएंगे।

खान सर, बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के एक ट्वीट का हवाला देते दिखे, जिसमें मोदी ने केंद्रीय रेल मंत्री के साथ उनकी बातचीत के बारे में बात की थी।

आरआरबी-एनटीपीसी परीक्षा 2021 का परिणाम 15 जनवरी को घोषित किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन ने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया क्योंकि उम्मीदवार रेल पटरियों पर बैठ गए, एक ट्रेन में आग लगा दी और राज्य में विभिन्न स्थानों पर पथराव किया।

रेलवे ने यह भी कहा कि इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान तोड़फोड़ और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले सभी छात्रों को भविष्य की भर्ती में शामिल होने से रोक दिया जाएगा।

हालांकि, यूट्यूबर ने अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने से पहले मीडियाकर्मियों से कहा था कि ‘‘अगर इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में उनकी भूमिका है तो उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।’’

उन्होंने हिंसा के लिए आरआरबी को भी जिम्मेदार ठहराया क्योंकि उसने इंटरमीडिएट और स्नातक दोनों छात्रों को एक ही परीक्षा दी थी। उन्होंने दलील दी कि इससे स्नातक छात्रों को इंटरमीडिएट के छात्रों के मुकाबले फायदा हुआ।

राजनीतिक दल खान सर के समर्थन में उतरे।

इस बीच बिहार में कई राजनीतिक दल खान सर के समर्थन में उतर आए हैं। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजग के घटक- हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने खान सर के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की है।

मांझी ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस तरह के कदम से छात्रों का आंदोलन और तेज हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘खान सर जैसे शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी छात्रों को बिहार में और अधिक अघोषित आंदोलन के लिए उकसा सकती है। सरकारों के लिए बेरोजगारी पर बात करने और समाधान निकालने का समय आ गया है।’’

इसी तरह, जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव भी खान सर के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों और शिक्षकों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आरआरबी-एनटीपीसी आंदोलन मामले में शिक्षकों को निशाना बनाया जा रहा है।’’

 (भाषा के इनपुट के साथ)

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न्यूज डेस्क

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