रिश्वतखोर प्रधान आरक्षक को 04 वर्ष का सश्रम कारावास।

सीधी।माननीय विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) सीधी द्वारा निर्णय पारित कर आरोपी सुरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान (प्रधान आरक्षक थाना अजाक) पिता छोटेलाल सिंह चौहान उम्र-50 वर्ष निवासी नौढि़या थाना सीधी को धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अंतर्गत 04 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10000 रूपए अर्थदंड एवं धारा 13 (1) (डी) सहपठित धारा 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अंतर्गत आरोपी को 04 वर्ष का सश्रम कारावास तथा 10000 रूपए अर्थदंड से दंडित किया।

कु. सीनू वर्मा मीडिया सेल प्रभारी (लोक अभियोजन) सीधी द्वारा घटना का संक्षिप्त विवरण बताया गया कि शिकायतकर्ता पवन कुमार द्विवेदी (निवासी ग्राम पखड़ा थाना बहरी जिला सीधी) का बड़ा भाई ललित द्विवेदी जो कि वर्ष 2009 से जिला जेल सीधी में 10 साल की सजा काट रहा था।  जिसको पैरोल में बाहर आना था।

दिनांक 09.01.15 को दोपहर में आरोपी सुरेन्द्र सिंह शिकायतकर्ता के घर आया और एक आवेदन पत्र दिखाकर बोला कि तुम्हारे भाई के खिलाफ लालजी साकेत ने एस.सी.एस.टी. एक्ट के तहत शिकायत की है। शिकायतकर्ता के भाई को एस.सी.एस.टी. एक्ट से बचाने के लिए आरोपी सुरेन्द्र सिंह द्वारा 5000 रूपए की मांग की, जबकि शिकायतकर्ता के भाई पर कोई भी एस.सी.एस.टी. एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज नहीं थी। तब आरोपी ने 1000 रूपए फरियादी से ले लिया था।

शिकायतकर्ता ने दिनांक 21.01.15 को आरोपी के विरूद्ध पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त कार्यालय रीवा संभाग रीवा के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत किया। पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त रीवा के निर्देशानुसार लोकायुक्त रीवा टीम के द्वारा आरोपी को उस मांग के परिपेक्ष्य में स्थान सर्किट हाऊस के गेट के पास सीधी फरियादी पवन कुमार द्विवेदी से 4000 रूपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। इस प्रकार आरोपी ने दिनांक 23.01.15 को सर्किट हाऊस के गेट के पास 4000 रूपए पारितोषिक के रूप में प्राप्त कर आर्थिक/धनीय लाभ प्राप्त किया।

विवेचना उपरांत अभियोगपत्र माननीय विशेष न्या‍यालय (भ्रष्टारचार निवारण अधिनियम) सीधी के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिससे संबंधित अपराध क्र. 26/15 एवं विशेष सत्र प्रकरण क्र. 02/15 में श्री प्रशांत कुमार पाण्डेय, सहा. जिला अभियोजन अधिकारी सीधी ने सशक्त पैरवी करते हुए अंतिम तर्क में मौखिक रूप में उचित एवं प्रभावशील तर्क रखते हुए आरोपी सुरेन्द्रस प्रताप सिंह चौहान को दोषी प्रमाणित कराया गया।