कौन अपना, कौन पराया, मुझे इससे कोई फर्क नहीं।

कौन अपना, कौन पराया, मुझे इससे कोई फर्क नहीं।

मैं कब हारामैं कब जीतामुझे इससे कोई फर्क नहीं। कौन अपना कौन पराया मुझे इससे कोई फर्क नहीं। मैं क्यों रोयामैं क्यों हंसा मुझे इससे कोई फर्क नहीं। कौन मेरा कौन तेरामुझे इससे कोई फर्क … Read more

बदलते रंग ..... नफ़रत के बदलते नए-नए रंग

बदलते रंग ….. नफ़रत के बदलते नए-नए रंग (हिन्दी कविता)

बदलते हुए रंगों के साथ बदलते हुएअपने लोग देखे हैं।चेहरे पर नकाब ओढ़ेसीने पर वार करते अपने ही लोग देखे हैं। हरे रंगों जैसी अब लोगों के दिलों में हरियाली कहाँ ?अपने ही लोगखंजर फेर … Read more

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