कांग्रेस के बाद भाजपा ने भी प्रबल ओबीसी (OBC) दावेदार का काटा पत्ता

एस पी वर्मा

सिंगरौली: अनारक्षित सिंगरौली महापौर का टिकट ओबीसी समाज से किसी को मिलने का दिवास्वप्न देख रहे बहुसंख्यक ओबीसी समाज को उस समय तगड़ा झटका लगा जब कांग्रेस व भाजपा ने ओबीसी समाज के दो प्रबल दावेदारो को बड़ी ही चतुराई से लिस्ट से बाहर कर दिया। बहुसंख्यक ओबीसी समाज के विरोध को दबाने व उनके समर्थकों को लुभाने कांग्रेस पार्टी ने जहां राम शिरोमणि शाहवाल को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया तो वहीं भाजपा ने भी अपने पार्टी के प्रबल दावेदार राम निवास शाह को सूची से बाहर कर सीधी जिले का नगरीय चुनाव प्रभारी बनाकर सबको चौका दिया।

दोनों पार्टियों द्वारा ओबीसी समाज के प्रबल दावेदारों का सुनियोजित तरीके से टिकट काटने से आशान्वित ओबीसी समाज के लोगों को जोर का झटका धीरे से नही बल्कि बहुत जोरों से लगा है। हालाकि भाजपा में अभी भी ओबीसी समाज से चंद्रप्रताप विश्वकर्मा , नरेश, दिलीप व पी एन वैश्य (विधायक पुत्र) लाइन में हैं। क्या पता इनमें से किसी को मौका मिल जाए।

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कांग्रेस पार्टी से महापौर का टिकट पाने के प्रबल दावेदार राम शिरोमणि शाहवाल कांग्रेस पार्टी में पिछले 35 वर्ष से जुड़े हैं और पूरी निष्ठा से पार्टी की सेवा कर रहे हैं। श्री शाहवाल वर्तमान में मध्यप्रदेश कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष, ओबीसी राष्ट्रीय महासभा के प्रदेश महामंत्री के पद पर कार्यरत हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव व ओबीसी समाज से मिल रहे भारी समर्थन की वजह से श्री शाहवाल ने कांग्रेस में अपनी मज़बूत दावेदारी ठोकी थी लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने शायद पहले से ही मन बना लिया था की अनारक्षित सीट पर इस बार सामान्य वर्ग के ही किसी कैंडीडेट को मौका देगी (ये अलग बात है की हमेशा की तरह इस बार भी अजय सिंह राहुल भैया की चली और उन्होंने ननि चुनाव में गच्चा खा चुके अरविन्द सिंह चंदेल का नाम सजेस्ट किया) और टिकट भी फाइनल हो गया।

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श्री चंदेल के नाम पर मुहर लगने के बाद कांग्रेस ओबीसी समर्थको को मानो जोर का झटका धीरे से नही बल्कि बहुत जोरो से लगा। शहर कांग्रेस अध्यक्ष के महापौर प्रत्याशी घोषित होने के बाद पार्टी ने बडी चतुराई से राम शिरोमणि शाहवाल को रिक्त शहर का कार्यवाहक अध्यक्ष बना दिया इसमें भी यह अकेले नही है बल्कि इनके साथ मोरवा के मनोज कुलश्रेष्ठ भी शहर की अध्यक्षीय संभालेंगे। श्री शाहवाल पार्टी के निर्णय को माथे पर लगा कर शहर कार्यवाहक की अध्यक्षीय में सक्रिय हो गए हैं लेकिन समर्थको के बीच भारी असंतोष व्याप्त है।

अब बात करते हैं भाजपा से महापौर का टिकट पाने के प्रबल दावेदार राम निवास शाह की। कांग्रेस ने जब राम शिरोमणि का पत्ता काटा तो ओबीसी समाज आश्वस्त था की बीजेपी से राम निवास शाह को पक्का टिकट मिल सकता है लेकिन राजनीति के “शह मात” को समझना इतना आसान नहीं है। शनिवार को 12 बजे दोपहर तक दावेदारों की रेस में आगे चल रहे राम निवास शाह व ओबीसी समर्थको को उस समय झटका लगा जब भोपाल से सोशल मीडिया पर एक सूची वायरल हुई जिसमे राम निवास शाह का नाम था।

जिसमे श्री शाह को सीधी जिले का नगरीय चुनाव प्रभारी बनाया गया है। दावेदार श्री शाह सहित उनके समर्थक समझ नही पा रहे की भाजपा से मिली इस बडी जिम्मेदारी के लिए वरिष्ठ नेतृत्व का आभार जताए या मातम मनाए। जो भी हो ओबीसी समाज से खासतौर से शाहू समाज के दोनों प्रबल दावेदारों को सूची से बाहर करने से ओबीसी समर्थको के बीच भारी असंतोष व्याप्त है। कांग्रेस पार्टी में वेकेंसी क्लोज हो गई है पर भाजपा में अभी उम्मीद बाकी है। आगे देखना होगा की बीजेपी किसी ओबीसी को टिकट देगी या फ़िर कांग्रेस की तर्ज पर सामान्य वर्ग के ब्राह्मण, अग्रवाल, गोयल या गुप्ता समाज से किसी को।