Bank Fraud : 22,842 करोड़ के बैंक घोटाले में SBI और CBI पर उठे सवाल, जानिए क्या है पूरा मामला

Bank Fraud : स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े बैंक घोटाले(bank scam) के मामले में CBI जांच पर कई सवाल खड़े हो रहे है, दूसरी ओर, SBI से सवाल किया जा रहा कि उसने इतने साल बाद शिकायत क्यों की। यह घोटाला 22,842 करोड़ रुपये का है। करोड़ों का यह घोटाला 2012 में सामने आया था, लेकिन पहली शिकायत 8 नवंबर 2019 को दर्ज की गई थी।

दूसरे शब्दों में, सीबीआई और शिकायतकर्ता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank Of India) दोनों इस मामले में सवालों के घेरे में हैं। वहीं, पहले आरोप में CBI ने मार्च 2020 में SBI से स्पष्टीकरण मांगा था. SBI ने अगस्त 2020 में स्पष्टीकरण के साथ एक नई शिकायत दर्ज की, लेकिन CBI ने लगभग 18 महीने बाद 7 फरवरी, 2022 को मामला दर्ज किया। हालांकि SBI ने आरोपों पर सफाई दी है, लेकिन CBI चुप है।

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Bank Fraud : आपको बता दें कि गुजरात स्थित कंपनियों एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और एबीजी इंटरनेशनल लिमिटेड को 28 बैंकों के कंसोर्टियम ने लोन दिया गया था, SBI bank के अधिकारियों के अनुसार, कंपनी के खराब प्रदर्शन के कारण नवंबर 2013 में यह दिवालिया हो गई थी। कंपनी को बचाने के कई प्रयास किए गए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद कंपनी का फॉरेंसिक ऑडिट कराया गया, जिसकी रिपोर्ट 2019 में आई।

कंसोर्टियम का नेतृत्व ICICI bank ने किया था, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक के रूप में SBI ने CBI में शिकायत दर्ज कराई थी। बैंकों को 22,842 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जिसमें ICICI बैंक को सबसे ज्यादा 7,089 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।

Bank Fraud : इस मामले में 12 फरवरी को CBI ने मुंबई, पुणे, सूरत और भरूच समेत 13 जगहों पर छापेमारी की, जहां कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद हुए, जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पूरे देश में हैं। इस मामले में सरकार ने कहा है कि घोटाला यूपीए सरकार (UPA Goverment) का है और इसके सामने आते ही कार्रवाई की गई। 

CBI ने एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके पूर्व सीएमडी ऋषि कमलेश अग्रवाल और तत्कालीन निदेशक संथानम मुथुस्वामी और अश्विनी कुमार के खिलाफ 22,842 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी Bank Fraud का मामला दर्ज किया है। कंपनी दहेज, गुजरात और सूरत में जहाजों का निर्माण और मरम्मत करती है। कंपनी अब तक 185 जहाजों का निर्माण कर चुकी है।