Chhathi Maiya : कौन हैं छठी माईया ? जानिए Chhath Puja में कब, क्या क्या किया जाता है। 

Chhathi Maiya : बिहार के सबसे महत्वपूर्ण त्योहार छठ के पावन अवसर पर भगवान सूर्य और देवी छठी माईया Chhathi Maiya की पूजा की जाती है। छठ में  माता-पिता अपने बच्चों के स्वास्थ्य, दीर्घायु और हर क्षेत्र में सफलता के लिए उपवास रखते हैं। यह उपवास 36 घंटे का कठोर निर्जल उपवास होता है।

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कार्तिक मास शुक्लपक्ष की चतुर्थी को पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य एवं चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। इस लेख में आप जानेंगे कौन हैं छठी माईया Chhathi Maiya और इस पावन पर्व में कब क्या क्या किया जाता है। 


सुनिए केलवा के पात पर । SHARDA SINHA I Chhath Pooja Geet


कौन हैं छठी माईया Chhathi Maiya ?

पुराणों में कहीं सूर्य की पत्नी संज्ञा को छठी माईया Chhathi Maiya कहा गया है तो कहीं कार्तिकेय की पत्नी। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, प्रकृति के छठे भाग से निकलने वाली 16 मातृकाओं (माताओं) में प्रसिद्ध छठी देवी (Chhathi Maiya) को ब्रह्मा की मानस पुत्री के रूप में वर्णित किया गया है और सूर्य की छह मुख्य किरणें दहानी , पचनी, धूमरा, कार्शनी, वार्शिनी और रस मानी गई हैं। इन छ: रश्मियों के संयुक्त रूप को छठी माईया Chhathi Maiya कहा जाता है।

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छठी माईया Chhathi Maiya एवं सूर्य पूजा का

Chhath Puja : छठ पूजा में उगते सूर्य को क्यों दिया जाता है अर्घ्य ?

विस्तृत कार्यक्रम 2022 

 ‘नहाय खाय’

कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी (26 अक्टूबर 2022) को नहाय खाय का कार्यक्रम होगा। इस दिन नहाने के बाद पूरे घर की खास सफाई की जाती है। इस दिन चने की दाल, लौकी की सब्जी और भात  को प्रसाद के रूप में बनाया जाता है।इस प्रसाद को पूरा परिवार और व्रती सेवन करते है। प्रसाद में सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है।

‘खरना’

‘नहाय खाय’’ के अगले दिन (27 अक्टूबर 2022) ‘खरना’ की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन महिलाएं  व्रत रखकर गुड़ का खीर बनाती है। रात में व्रत रखने वाले पति-पत्नी पहले इसका सेवन करते हैं, फिर इसे प्रसाद के रूप में परिवार के बाकी लोगों में बांटा जाता है। इसके साथ ही निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जो लगभग 36 घंटे तक तक चलता है।

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‘डूबते सूर्य को अर्घ्य’

डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के दिन व्रती को पूरे दिन निर्जला व्रत रखती है। शाम को किसी नदी या तालाब के पानी में खड़े डूबते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। यह छठ पर्व का मुख्य दिन माना जाता है।

‘डूबते सूर्य को अर्घ्य’ इस साल 30 अक्टूबर 2022, दिन रविवार को दिया जाएगा। 

‘उगते सूर्य को अर्घ्य’

चौथे दिन सूर्योदय के समय उपवास करने वाले जोड़े पानी में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और सूर्यापासना करते हैं। इसके बाद व्रत करने वाले व्रत का पारण करते है। 

‘उगते सूर्य को अर्घ्य’ इस साल 31  अक्टूबर 2022, दिन रविवार को दिया जाएगा। 

Posted By- Sonu Vishwakarma

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