मप्र में फिर बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी, कोयला परिवहन के नाम पर दाम में बढ़ोतरी

Electricity prices increased again in MP : मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ता एक बार फिर महंगाई की मार झेल रहे हैं। बिजली कंपनियों ने तीन महीने में दूसरी बार कीमतों में इजाफा किया है। इस बार कोयला ट्रांसपोर्टेशन के नाम पर बिजली के दाम बढ़ाए गए हैं।

अगर आप यहां 200 यूनिट तक बिजली की खपत करते हैं तो आपको अक्टूबर के मुकाबले 22 रुपये ज्यादा चुकाने होंगे। मध्य प्रदेश में नवरात्रि के दौरान बिजली उपभोक्ताओं को महंगा बिजली का झटका लगा। दरअसल, एफसीए (फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट) में 10 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद ग्राहकों को अब 10 पैसे की जगह 20 पैसे प्रति यूनिट का FCA देना होगा। बढ़ी हुई दरें एक अक्टूबर से प्रभावी होंगी। हालांकि, 100 यूनिट तक के बिजली उपभोक्ताओं को फिलहाल 100 रुपये ही देने होंगे। क्योंकि सरकार बिजली कंपनियों को सब्सिडी देकर मुआवजा देती है।

पावर मैनेजमेंट कंपनी के प्रभारी सीजीएम शैलेंद्र सक्सेना के मुताबिक, बिजली कंपनियों को हर तीन महीने में नियामक आयोग द्वारा तय की गई ईंधन लागत मिलती है। एफसीए की दर कोयला परिवहन और बिजली उत्पादन में ईंधन की खपत के आधार पर निर्धारित की जाती है। कंपनियां बिजली दरों के अलावा उपभोक्ताओं से एफसीए भी लेती हैं।

मप्र में फिर बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी

एक साल में 37 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी

बिजली कंपनियों ने एक साल में एफसीए में 37 पैसे की बढ़ोतरी की है। एक साल पहले कंपनियां फ्यूल कॉस्ट के तौर पर माइनस 17 पैसे चार्ज करती थीं। अब यह 20 पैसे प्रति यूनिट है। सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि बिजली कंपनी ने बिना किसी नोटिस के ईंधन शुल्क में वृद्धि की है। यह उपभोक्ताओं के साथ एक तरह का धोखा है। बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं पर बोझ डाल रही हैं।

इससे पहले अप्रैल और जुलाई में चार्ज बढ़ाया गया था

बिजली कंपनियों ने इस साल अप्रैल में भी बिजली के दाम में बढ़ोतरी की थी। बिजली की कीमतों में औसतन 2.64% की बढ़ोतरी की गई है। घरेलू बिजली की दर में 3 से 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। एफसीए शुल्क अप्रैल में बढ़ाए गए थे। तब प्रति यूनिट शुल्क 6 पैसे है। दूसरी तिमाही में इसमें 10 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई। अब तीसरी तिमाही में 10 पैसे प्रति यूनिट को बढ़ाकर 20 पैसे कर दिया गया है।

FCA क्या है?

FCA (Fuel Cast Adjustment) यानी ईंधन लागत समायोजन वह राशि है जो बिजली कंपनी द्वारा ईंधन या कोयले की अलग-अलग कीमत के आधार पर बिल में जोड़ी जाती है। कोयले या ईंधन की कीमत हर महीने मांग और आपूर्ति के आधार पर बदलती रहती है। इससे बिजली उत्पादन की लागत भी बदल जाती है। बिजली पैदा करने वाली कंपनियां इसे बिजली वितरण कंपनियों से वसूल करती हैं। यह चार्ज उपभोक्ता पर लगाया जाता है। टैरिफ साल में एक बार तय होता है। जहां एफसीए त्रैमासिक (तीन महीने) निर्धारित किया जाता है।

एफसीए उपभोक्ताओं से लिया जाता है। एमपी विद्युत नियामक आयोग की हर तीन महीने में बैठक होती है। इसमें बिजली कंपनियों को नियामक आयोग द्वारा तय फ्यूल चार्ज (FC) मिलता है। एफसीए दरें कोयला परिवहन और बिजली उत्पादन के लिए ईंधन की कीमतों के आधार पर निर्धारित की जाती हैं। कंपनियां बिजली दरों के अलावा उपभोक्ताओं से एफसीए भी लेती हैं।

एक साल में एफसीए 37 पैसे बढ़ा

बिजली कंपनियों ने एक साल में एफसीए (फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट) में 37 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की है। एक साल पहले कंपनियां फ्यूल कॉस्ट के तौर पर माइनस 17 पैसे चार्ज करती थीं। अब यह 20 पैसे प्रति यूनिट है। सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि बिजली कंपनी ने बिना किसी नोटिस के ईंधन शुल्क में वृद्धि की है। यह उपभोक्ताओं के साथ एक तरह का धोखा है। बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं पर बोझ डाल रही हैं।

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