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भारत में समाचार वेबसाइटों, सोशल मीडिया और ओटीटी के नए IT नियम 2021

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों ने आम उपयोगकर्ताओं को सशक्त बनाया है। लेकिन इसका दुरुपयोग होने और गलत लाभ उठाने पर वे अवश्‍य जवाबदेह होंगे। भारत में समाचार वेबसाइटों, सोशल मीडिया और ओटीटी सेवाओं के लिए दिशा-निर्देश बनाए गए हैं।नए नियम सोशल मीडिया के सामान्य उपयोगकर्ताओं को सशक्त बनाएगा।

डिजिटल मीडिया और ओटीटी से जुड़े नियमों में आतंरिक एवं स्व-नियमन प्रणाली पर अधिक फोकस किया गया है। जिसमें पत्रकारिता व रचनात्मक स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए एक मजबूत शिकायत निवारण व्‍यवस्‍था की गई है। 

कंटेंट का स्व वर्गीकरण 

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, जिन्हें नियमों में ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट के प्रकाशक कहा गया है,के लिए अपने कंटेंट को उम्र आधारित पांच कैटेगरी में बांटना अनिवार्य कर दिया गया है। 

  • यू (यूनिवर्सल), यू/ए 7+, यू/ए 13+, यू/ए 16+, और ए (वयस्क) के आधार पर कंटेंट का खुद ही वर्गीकरण करना होगा।
  • प्लेटफॉर्म्स को यू/ए 13+ या उससे ऊंची श्रेणी के रूप में वर्गीकृत कंटेंट के लिए अभिभावक लॉक लागू करने की जरूरत होगी
  • “ए” के रूप में वर्गीकृत कंटेंट के लिए एक विश्वसनीय उम्र सत्यापन तंत्र विकसित करना होगा।

ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट के प्रकाशक को हर कंटेंट या कार्यक्रम के साथ कंटेंट विवरणक में प्रमुखता से वर्गीकरण रेटिंग का उल्लेख करते हुए उपयोगकर्ता को कंटेंट की प्रकृति बतानी होगी और हर कार्यक्रम की शुरुआत में दर्शक विवरणक (यदि लागू हो) पर परामर्श देकर कार्यक्रम देखने से पहले सोच समझकर फैसला लेने में सक्षम बनाना होगा।

वो कॉन्टेंट जो सोशल मीडिया के लिए वर्जित किया गया 

सोशल मीडिया SOCIAL MEDIA के लिए 10 तरह के कॉन्टेंट को वर्जित किया गया है।यह वो सामग्री है जिस से

  • भारत की एकता,अखंडता,सुरक्षा और संप्रभुता को खतरा होता हो।
  • मित्र देशों से भारत के संबंधों पर खतरा होता हो। 
  • पब्लिक ऑर्डर को खतरा होता हो।
  • किसी जुर्म को करने के लिए भड़काती हो या जो किसी अपराध की जांच में बाधा डालती हो। 

निजता का हनन,मानहानि और अश्लीलता पर प्रतिबंध 

वह सामग्री जिससे किसी की मानहानि होती हो, जिसमें अश्लीलता हो, जिससे दूसरों की निजता का हनन होता हो, लिंग के आधार पर अपमान होता हो, जो नस्ल के आधार पर आपत्तिजनक हो और जिससे हवाला या जुए को प्रोत्साहन मिलता हो ऐसे सभी सामाग्री को प्रतिबंधित किया गया है। 

शिकायत मिलने पर 24 घंटों में उसे दर्ज करना होगा। 

  • सोशल मीडिया कंपनियों को आम लोगों से शिकायत मिलने पर 24 घंटों में उसे दर्ज करना होगा। 
  • 15 दिनों के अंदर उस पर कार्रवाई करनी होगी। 
  • सोशल मीडिया कंपनियों को एक शिकायत निवारण अधिकारी और एक अनुपालन अधिकारी भारत में ही नियुक्त करना होगा।

क्या हैं डिजिटल मीडिया के नए नियम ?

DIGITAL MEDIA : समाचार प्रशासकों को डिजिटल मीडिया पर ‘भारतीय प्रेस परिषद’ के पत्रकारिता आचरण मानदंड और ‘केबल टेलीविज़न नेटवर्क विनियमन अधिनियम, 1995’ के तहत कार्यक्रमों पर नज़र रखनी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि  ऑफलाइन (प्रिंट, टीवी) और डिजिटल मीडिया को एक समान वातावरण में उपलब्ध कराया जा सके।

शिकायत समाधान तंत्र

नियमों के तहत स्व-विनियमन के विभिन्न स्तरों के साथ एक तीन स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया गया है।

  • स्तर-I : प्रकाशकों द्वारा स्व-विनियमन
  • स्तर-II : प्रकाशकों की स्व-विनियमित संस्थाओं का स्व-विनियमन
  • स्तर-III : निगरानी तंत्र

प्रकाशकों द्वारा स्व-विनियमन

प्रकाशक को भारत में एक शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो प्राप्त शिकायतों के समाधान के लिये जवाबदेह होगा।यह अधिकारी स्वयं द्वारा प्राप्त हर शिकायत पर 15 दिन के भीतर निर्णय लेगा।

स्व-विनियमित संस्था

प्रकाशकों की एक या ज़्यादा स्व-विनियामकीय संस्थाएँ हो सकती हैं।ऐसी संस्था की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय का एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश या एक स्वतंत्र प्रतिष्ठित व्यक्ति करेगा, जिसमें छह से अधिक सदस्य नहीं होंगे।इस संस्था को सूचना और प्रसारण मंत्रालय में पंजीकरण कराना होगा।

यह संस्था प्रकाशक द्वारा पालन किये जा रहे आचार संहिता संबंधी नियमों की निगरानी करेगी और उन शिकायतों का समाधान करेगी, जिनका प्रकाशक द्वारा 15 दिन के भीतर समाधान नहीं किया गया है।

निगरानी तंत्र 

सूचना और प्रसारण मंत्रालय एक निगरानी तंत्र विकसित करेगा।यह आचार संहिताओं सहित स्व-विनियमित संस्थाओं हेतु एक चार्टर का प्रकाशन करेगा। यह शिकायतों की सुनवाई के लिये एक अंतर विभागीय समिति का गठन करेगा।

स्रोत : पीआईबी 

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अब्दुल रशीद

Abdul Rashid is a well-known Journalist, Political Analyst and a Columnist on national issue. Cont.No.-7805875468, Email - editor@urjanchaltiger.in
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