मध्यप्रदेश

टूटती सांसों को ऑटोरिक्शा चालक,जो दे रहा मुफ्त में ऑक्सीजन।

मध्यप्रदेश के भोपाल रिक्शा चालक मोहम्मद जावेद खान ने कोरोना के मरीजों को उनके परिजनों द्वारा अपने कंधे पर उठाकर अस्पताल ले जाते देखा, तो उन्होंने मदद करने का फैसला किया। पत्नी के गहने बेच दिए और ऑटोरिक्शा को ‘एंबुलेंस’ बना डाला।

जावेद खान के ऑटोरिक्शा में कोरोना के मरीजों के लिए ऑक्सीजन का सिलेंडर लगा है। उसमें ऑक्सीमीटर है, जिससे खून में ऑक्सीजन का स्तर देखा जा सकता है और अन्य मेडिकल उपकरण लगे हैं।

कोरोना वायरस के मामलों की बढ़ती संख्या के कारण भारत में मेडिकल स्टाफ और अस्पताल दबाव में हैं। ऐसे में जावेद खान जैसे लोग लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं।

जावेद खान कहते हैं, “कोविड-19 का गंभीर मरीज बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के अस्पताल नहीं लाया जा सकता है। इसलिए मैंने सोचा ऑटोरिक्शा को एंबुलेंस में क्यों ना बदल डालूं.

“वे कहते हैं कि यह छोटा कदम है लेकिन इससे लोगों की जान बचाई जा सकती है।

जावेद खान कहते हैं, “मैं देखता हूं कि युवा मरीज भी ऑक्सीजन के बिना तड़पते है। एंबुलेंस वाले अपनी सेवा देने के लिए पांच से दस हजार रुपये वसूल रहे हैं। एक गरीब परिवार इतने पैसे कहां से ला सकता है?”

सोशल मीडिया के दबाव के बाद मिला विशेष पास

एक बार, लॉकडाउन के दौरान जावेद को पुलिस ने आपातकालीन पास नहीं होने के कारण रोक लिया था। लेकिन सोशल मीडिया पर हंगामे के बाद पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया और उन्हें विशेष पास दिया।

जावेद को एक व्यक्ति ने ऑक्सीजन का सिलेंडर दान किया है जबकि एक और एक शख्स ने ऑक्सीमीटर दिया है। एक डॉक्टर ने जावेद को सिखाया कि कैसे ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल करके मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाए।

जावेद बताते हैं कि कई लोग उनकी मदद के लिए आगे आए हैं और उन्हें महामारी के खत्म होने तक इसी तरह से काम करने का अनुरोध किया है।

जावेद कहते, “यह इतने सारे लोगों की मदद के बिना संभव नहीं है और मैं उन्हें धन्यवाद कहता हूं। मैं अकेले अपने दम पर ऐसा नहीं कर सकता था।”

सोर्स ; Dw

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