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मध्यप्रदेश में चार दिनों में 42 मोरों की मौत,अवैध शिकार का शक !

मुरैना न्यूज़

मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के डोंसा गांव में पिछले चार दिनों में 42 मोरों की मौत हो गई, जो इस क्षेत्र में शामिल अवैध शिकार रैकेट की ओर इशारा करता है। 16 जून को 12 मोर मृत पाए गए थे। कुल में से 30 की रविवार को मौत हो गई। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की टीम ने राष्ट्रीय पक्षियों के शरीर में जहरीले तत्व पाए हैं।


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जानकारी के अनुसार शनिचरा वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले डोंसा गांव में 30 मोर मृत पाए गए। जंगल के पास खेत रखने वाले ग्रामीणों ने मृत पक्षियों को देखा और वन विभाग के अधिकारियों को सूचित किया।

तीन डॉक्टरों द्वारा बमोर पशु चिकित्सा केंद्र में पोस्टमार्टम किया गया। जहर की पुष्टि के लिए विसरा रिपोर्ट सागर, जबलपुर और ग्वालियर प्रयोगशाला भेजी गई थी। वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि मौके पर गेहूं और चावल मिले हैं। ऐसा माना जाता है कि शिकारियों ने मांस और पंखों के लिए राष्ट्रीय पक्षियों को मारने के लिए जहरीला गेहूं और चावल डाला होगा।

पोस्टमार्टम टीम में शामिल डॉक्टर विवेक श्रीवास्तव ने पुष्टि की कि शरीर में जहरीले तत्व पाए गए हैं। हमने जहरीले तत्वों की पहचान करने के लिए नमूने प्रयोगशाला में भेजे हैं और यह भी पता लगाने के लिए कि पक्षी के शरीर में इसे कैसे इंजेक्ट किया गया था। वन विभाग के अधिकारियों ने गेहूं और चावल के नमूने भी एकत्र कर आगे की जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं। हम आगे की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए नमूनों की सभी रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद ही निष्कर्ष निकालेंगे।


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मुरैना संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) अमित निकम ने मौत की पुष्टि की और कहा कि अवैध शिकार की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। 

विशेष रूप से, मोर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची -1 के तहत संरक्षित हैं। यह पहली बार नहीं है जब जिले में इतनी बड़ी संख्या में मोर मृत पाए गए हैं।

नवंबर 2016 में, जिले के सुमावाली वन रेंज में लगभग 50 मोर मृत पाए गए थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला था कि उन्हें जहर देकर मारा गया था। वन विभाग ने बाद में अवैध शिकार के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया था।

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न्यूज़ डेस्क,

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