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मध्यप्रदेश का अचूक निशानेबाज़, थानेदार कचरे के ढेर में खाना तलाशता मिला।


मध्यप्रदेश,ग्वालियर के झांसी रोड क्षेत्र में सालों से सड़कों पर फकीरी और फ़ाकी की जिंदगी दरबदर भटक कर गुज़ार रहा शख्स पुलिस अफसर है,जानकार चौकिए नहीं,यह कोई किस्सा नहीं कड़वी हक़ीक़त है। वह भी कोई मामूली पुलिस अफ़सर नहीं है, मध्यप्रदेश,1999 बैच का वह शानदार अचूक निशानेबाज था। नाम है मनीष मिश्रा।


वही मनीष मिश्रा जिसने मध्यप्रदेश के कई थानों में थानेदार के रूप थानेदारी किए हैं। जब उनके साथी  ने मनीष के फकीरी के रूप में देखा तो वे हतप्रभ रह गए। शायद उनके साथियों ने सपनों में भी नहीं सोचा होगा के एक दिन उनके अचूक निशानेबाज़ मनीष उन्हे इस हालत में मिलेंगे।जिन दो पुलिस अफ़सर साथियों ने उन्हे ढूंढा मनीष का उन दोनों के साथ 1999 में पुलिस सब इंस्पेक्टर में भर्ती हुआ था।किस्मत और हालात का खेल देखिए आज दोनों DSP हैं,और मनीष … !

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मनीष के परिजनों का कहना है कि उनका मानसिक संतुलन खराब है। लेकिन 10 नवंबर 2020 मतगणना की रात 1:30 बजे जो कुछ भी हुआ, वह घटनाक्रम काफी है यह प्रमाणित करने के लिए की नही मनीष मिश्रा पागल हैं और न उनकी याददाश्त ख़राब है।मतगणना की रात को सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर और विजय सिह भदौरिया को दिया गया था। ड्यूटी  दौरान बंधन वाटिका के फुटपाथ पर एक भिखारी ठंड से कांपते हाथों से कचरे के ढेर में पेट की आग बुझाने के लिए खाना ढूंढ रहा था। उसे देखकर अफसरों ने गाड़ी रोक कर उसके पास पहुंच गए। दयनीय हालत देख DSP रत्नेश तोमर ने उन्हें अपने जूते और DSP विजय सिंह भदौरिया ने अपनी जैकेट दे दी।

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जब दोनों वहां से जाने लगे तो भिखारी सा देखने वाले उस युवक ने दोनों को उनके नाम से पुकारा। दोनों अफसर चौक कर एक-दूसरे को देखते रह गए। दोनों ने जब उससे पूछा तो उसने अपना नाम मनीष मिश्रा बताया। और यह भी बताया की दोनों अफसरों के साथ सन 1999 में पुलिस सब इंस्पेक्टर में भर्ती हुए थे। इसके बाद मनीष मिश्रा ने दोनों अधिकारियों के साथ लंबे समय तक बातचीत की। दोनों अफसरों ने अपने साथ ले जाने की जिद की लेकिन वह साथ चलने को तैयार नहीं हुआ। अंततः आखिर में अगले दिन समाजसेवी संस्था से मनीष मिश्रा को आश्रम भिजवा दिया, जहां मनीष मिश्रा की देखभाल की जा रही है।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह की 2005 में मनीष के साथ ऐसा क्या हुआ,जिसने अचूक निशाने बाज़ थानेदार को बदहाली के इस मुकाम तक पहुंचा दिया।

अब्दुल रशीद

Abdul Rashid is a well-known Journalist, Political Analyst and a Columnist on national issue. Cont.No.-7805875468, Email - editor@urjanchaltiger.in
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