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Maha Shivratri 2022: शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?

आज पूरे देश में महाशिवरात्रि Maha Shivratri 2021 बड़े धूम-धाम से मनाई जा रही है। इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव को फल-फूल अर्पित करते हैं और शिवलिंग पर दूध व जल अर्पित करते हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाशिवरात्रि की पूजा-अर्चना

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज महाशिवरात्रि Maha Shivratri 2021 पर पुराने भोपाल शहर में भवानी चौक सोमवारा के पास बड़वाले महादेव मंदिर पहुंचे। उन्होंने यहां शिवअभिषेक और पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री अनेक भक्तगण से भी मिले और उन्हें महाशिवरात्रि पर्व की बधाई दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मंदिर परिसर में जनता से संवाद भी किया।महाशिवरात्रि Maha Shivratri 2021

  • CM चौहान ने भगवान शिव के रथ को खींचा।
  • वे शिव जी की बारात में भी शामिल हुए।

इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह चौहान साथ थीं।इस अवसर परआलोक शर्मा,अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

महाशिवरात्रि का पर्व क्यों मनाया जाता है?

मान्यता और श्स्त्रो के अनुसार यह  रात वही रात है जब करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले ज्योतिर्लिंग के रूप में भगवान शिव प्रकट हुए थे। इसी मान्यता को मानते हुए वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का त्यौहार पूरे विधि-विधान के साथ मनाया जाता है।

महाशिवरात्रि का मतलब क्या है,जानिए 

उत्तरायण के समय जब धरती के उत्तरी गोलार्ध में सूरज की गति उत्तर की ओर होती है, तो एक विशेष शिवरात्रि को मानव शरीर में ऊर्जा कुदरती रूप मे ऊपर की ओर जाती हैं। इस रात को महाशिवरात्रि कहा जाता है। 

शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?

शिवरात्रि हर मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है लेकिन महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है। 

महाशिवरात्रि पर्व को हर-रात्रि, ‘हेराथ’ या ‘हेरथ’ भी कहा जाता हैं। 

महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है। मान्यता है कि सृष्टि का प्रारम्भ इसी दिन से हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ। इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। कश्मीर शैव मत में इस पर्व को हर-रात्रि और बोलचाल में ‘हेराथ’ या ‘हेरथ’ भी कहा जाता हैं। 

भगवान शिव अपने भक्तों को किसी प्रकार की कमी नहीं होने देते 

गरुड़ पुराण में वर्णित एक कथा अनुसार, इस दिन एक निषादराज अपने कुत्ते के साथ शिकार खेलने निकाला।  थककर चूर और भूख-प्यास से परेशान एक तालाब के किनारे,जहां बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग था पहुंचा। कहते हैं शरीर को आराम देने के उद्देश्य से कुछ बिल्व-पत्र तोड़े, जो शिवलिंग पर भी गिर गए। अपने पैर धोने के लिए तालाब का पानी छिड़का, जिसकी कुछ बून्दें शिवलिंग पर भी जा गिरीं। जब वह पैर धो रहा था तो उसका एक तीर नीचे गिर गया। तीर उठाने के लिए वह शिव लिंग के सामने नीचे को झुका। इस तरह शिवरात्रि के दिन अनजने में उसने शिव-पूजन की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली।

मृत्यु के बाद जब यमदूत उसे लेने आए, तो शिव के गणों ने उसकी रक्षा की और उन्हें भगा दिया। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव अनजाने में अपने भक्त को जब इतना फल देते हैं तो विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्तों को किसी प्रकार की कमी नहीं रहती है।

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न्यूज डेस्क

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