Mahatma Gandhi : के हमरा गांधीजी के गोली मारल ….. 

30 जनवरी 1948 को महात्मा मांधी (Mahatma Gandhi)पांच तत्वों में विलीन हो गए थे। जिसे शहीद दिवस(Martyrs’ Day) के रूप में मनाया जाता है। 30 जनवरी 1948 एक सामान्य दिन था, लेकिन शाम को यह इतिहास के सबसे काले दिन में बदल गया। दरअसल, इसी दिन शाम 5:16 बजे महात्मा गांधी संध्या प्रार्थना के लिए दिल्ली के बिड़ला भवन जा रहे थे तभी नाथूराम गोडसे उनके पास पहुंचा, पहले उनके पैर छुए और फिर अपनी  पिस्तौल से उनके सीने में एक के बाद एक तीन गोलियां दाग दी। गोली लगने के बाद बापू ने ‘हे ​​राम’ कहकर दुनिया को अलविदा कह दिया ।

गांधी जी  के प्रेरक विचार

के हमरा गांधीजी के गोली मारल ..... 

[box type=”note” align=”aligncenter” class=”” width=””]1-जो लोग अपनी तारीफ के भूखे होते हैं वे साबित करते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है। [/box]

[box type=”note” align=”aligncenter” class=”” width=””]2-व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों से नहीं बल्कि उसके चरित्र से की जाती है। [/box]

[box type=”note” align=”aligncenter” class=”” width=””]3-मैं उसे धार्मिक कहता हूं जो दूसरों का दर्द समझता है। [/box]

[box type=”note” align=”aligncenter” class=”” width=””]4-व्यक्ति अपने विचारों के सिवाय कुछ नहीं है. वह जो सोचता है, वह बन जाता है। [/box]

[box type=”note” align=”aligncenter” class=”” width=””]5-ताकत शारीरिक शक्ति से नहीं आती है, यह अदम्य इच्छाशक्ति से आती है।[/box] 

के हमरा गांधीजी के गोली मारल ….. 

  • Lyric : Rasool Miyan
  • Voice : Chandan Tiwari
  • Tabla : Manta Kumar

रसूल मियां बिहार के गोपालगंज के रहने वाले रचनाकार-कलाकार थे।

उन्होंने राम,कृष्ण,सत्याग्रह,चरखा,आजादी की लड़ाई और गांधीजी पर बेहतरीन रचनाएं की।

इस गीत की रचना उस दिन उन्होंने की थी,जिस दिन गांधीजी की हत्या हुई।तब रसूल मियां कलकत्ता में थे। उन्हें जैसे ही खबर मिली, वे अवाक रह गये। उनके मन में उपजे आह से एक गान निकला, जिसने  गीत का रूप ले लिया। वे उसी समय कलकत्ता की सड़क पर उसे गाने लगे ।  यह वही गीत है। 

https://youtu.be/9V7uwqWvncY