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FACELESS INCOME TAX अपील सिस्टम शुरू,जानिए TAXPAYERS के फायदे और नुकसान।

फेसलेस असेसमेंट की सुविधा और फेसलेस इनकम टैक्स अपील की व्यवस्था की सुविधा की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2020 के महीने में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया था।इनकम टैक्स चुकाने वाले करदाताओं के लिए फेसलेस असेसमेंट की सुविधा 13 अगस्त 2020 से लागू की गई है। जबकि इनकम टैक्स अपील की प्रक्रिया को भी 25 सितंबर से फेसलेस कर दिया गया है।

सरकार को उम्मीद है कि फेसलेस सिस्टम के जरिए जटिलता कम होगी और टैक्स कलेक्शन का दायरा बढ़ेगा। भारत में टैक्स के फेसलेस असेसमेंट की शुरुआत अक्टूबर, 2019 से पायलट बेसिस के आधार पर की गई थी।

फेसलेस असेसमेंट 

फेसलेस असेसमेंट में टैक्स देने वाले व्यक्ति को टैक्स ऑफिसर से मिलने या इनकम टैक्स ऑफिस जाने की कोई जरूरत नहीं है। पहले आयकर के किसी भी मामले को उसी शहर या ज़ोन के इनकम टैक्स अफसर देखते थे। लेकिन फेसलेस सिस्टम में देश के किसी भी कोने में बैठा अफसर किसी भी इलाके के आयकर के मामले को देख सकता है। कंप्यूटराइज्ड सिस्टम के जरिये तय होगा कि किसका टैक्स असेसमेंट कौन सा अफसर करेगा। असेसमेंट से निकला रिव्यू भी किस अफसर के पास जाएगा, किसी को पता नहीं होगा। पहले असेसमेंट का काम उसी क्षेत्र का टैक्स ऑफिसर करता था, जहां का मामला होता था। लेकिन अब किसी भी राज्य या शहर का अफसर किसी भी जगह के मामले की जांच कर सकता है।

फेसलेस अपील 

इस व्यवस्था के तहत करदाता की अगर कोई शिकायत है तो उसकी अपील को इसके लिए रैंडम तरीके से चुने गए अफसर के पास भेजा जाएगा।यह अफसर कौन है, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं होगी। यही नहीं, यह अफसर किसी भी शहर का हो सकता है। आयकरदाता को इसके लिए किसी भी दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। इस अपील पर अंतिम निर्णय अधिकारियों की एक टीम करेगी और इसकी समीक्षा भी टैक्सपेयर्स को कराने का अधिकार होगा। हालांकि गंभीर अपराध, बड़ी टैक्स चोरी, अंतरराष्ट्रीय टैक्स के मामले या देश के लिहाज से संवेदनशील मसले आदि मामलों में इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा।

अपील पर फैसला करने वाले अफसरों की पहचान भी जाहिर नहीं की जाएगी। किसी भी सवाल का जवाब इलेक्ट्रॉनिकली दिया जा सकता है। अपील में किए जाने वाले फैसले और रिव्यू टीम आधारित होंगे। हालांकि इनकम टैक्स कमिश्नर के स्तर तक होने वाली सारी अपील फेसलेस ही होगी, लेकिन कुछ मामलों में सीनियर अफसरों की मंजूरी के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए व्यक्तिगत तौर पर सुनवाई की इजाजत दी जा सकती है। इनकम टैक्स कमिश्नर के फैसले के खिलाफ अपील इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल में और उसके बाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में की जा सकती है।

फेसलेस असेसमेंट/अपील के फायदे  

नए व्यवस्था से भ्रष्टाचार और मनमानी रोकने की कोशिश है। इनकम टैक्स असेसमेंट और अपील को फेसलेस बनाने की नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आयकर अफसर किसी करदाता पर दबाव बनाकर उससे कोई अनुचित मांग नहीं कर सकेंगे। इसी तरह करदाता भी किसी खास अफसर से जान-पहचान बनाकर, उसके साथ सांठगांठ करके या उस पर दबाव बनाकर उसका कोई गलत फायदा नहीं उठा सकेंगे। फेसलेस असेसमेंट और अपील में ऑनलाइन काम होने के कारण मामलों का निपटारा तेजी से होगा।

फेसलेस असेसमेंट/अपील के नुकसान

जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था में कुछ दिक्कतें भी आ सकती हैं। मसलन, पुराने ढंग से बिज़नेस चलाने वाले लोगों को या सीनियर सिटिज़न्स को नए तौर-तरीके अपनाने में थोड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उन इलाकों में रहने वाले करदाताओं को इंटरनेट कनेक्शन या कंप्यूटराइज्ड सिस्टम की क्वॉलिटी अच्छी न होने पर अपने दस्तावेज अपलोड करने में दिक्कत हो सकती है।

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न्यूज़ डेस्क, उर्जांचल टाईगर

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