उर्जांचल की ख़बरेंसिंगरौली समाचार

राख़ ने तो, सब कुछ राख़ कर दिया !

सिंगरौली जिले को बिजली उत्पादन के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उर्जाधनी के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन एक कड़वा सच यह भी है के इस जिले को देश के सबसे पिछड़े 100 गाँव जहां मूलभूत सुविधा भी मयस्सर नहीं के सूची में शामिल किया गया था।

दरअस्ल सिंगरौली के कोख से जन्मी बिजली से तो देश के महानगर और बिजली उत्पादन करने वाली परियोजनाओं की कालोनियां तो जगमगाती है। लेकिन दूसरी तरफ सिंगरौली के मूलनिवासी जिनके जमीन को विकास के नाम पर लेकर उन्हें किसान से मजदूर बना दिया गाय और बतौर तोहफा परियोजनाओं से निकलने वाली राख, प्रदूषित वातावरण भी मिला।किसान से मजदूर बने इन लोगों को परियोजना या परियोजना के अधीन कंपनी में अस्थाई रूप से दिहाड़ी मजदूरी करने तक के लिए काफ़ी मशक्कत करना पड़ता है।इन लोगों को कई सुविधा परियोजना द्वारा देने की बात तो कही जाती है लेकिन हकीकत यह है के उनके परिसर में भी ये लोग बगैर इजाजत के नहीं जा सकते।हां, इनके घरो में परियोजनाओं से निकलने वाली राख कभी भी आ सकती है और बहा के ले जा सकती है।

बीते शुक्रवार भी ऐसा ही कुछ हुआ है। रिलायंस पावर प्लांट शासन स्थित ग्राम पंचायत हर्रहवा ऐश डैम जो कि परियोजना परिसर में स्थित है शाम लगभग 5:00 बजे फूटा,और राख के मलवे तेज़ बहाव में,गांव बह गया,मवेशी,फसल और अधिकृत आंकड़ों के अनुसार 06 व्यक्ति जिनमें पुरुष,महिला और बच्चे शामिल थे बह गए।दूसरे दिन 02 शव निकाला गया शेष सभी की तलाश जारी है।

हां,जो लोग इसमें बह कर,राख़ के मलवे में तड़प तड़प कर मर गए हैं यहां के जनप्रतिनिधियों के हाथ से परियोजना ने चंद सिक्के बतौर मुआवजा दे दिया है। यह चंद सिक्के उनकी तड़प की कीमत है या बेवाओं के मांग का सिंदूर है या माँ के सुने कोख का रुदान है या बेघर लोगों की चीत्कार पर मरहम है,नहीं नहीं,यह महज़ चंद सिक्के हैं बहरे थैलीशाहों के,ये इंसाफ नहीं,क्योंकि राख़ ने तो सब कुछ राख़ कर दिया है।

जिनका सब कुछ राख़ एचओ गया उनके आंख का आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा और कंपनी के लापरवाह अधिकारी जो इतने बड़े हादसे के बाद मौके पर आना तक उचित नहीं समझा ऐसे जिम्मेदारों को जिला प्रशासन के तरफ से कारण बताओं नोटिस दिया गया है। और मजिस्ट्रियल जॉच के आदेश के बाद निर्देशित किया गया है की जॉच की कार्यवाही पूर्ण कर 45 दिवस के अंदर जॉच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाये।

सवाल यह है के कब तक मुआवजा राशि तय किया जाता रहेगा और कब तक गरीबों की जिंदगी से खिलने वालों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं होगा?

अब्दुल रशीद

Abdul Rashid is a well-known Journalist, Political Analyst and a Columnist on national issue. Cont.No.-7805875468, Email - editor@urjanchaltiger.in

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