शिक्षासिंगरौली न्यूज

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों का निःशुल्क प्रवेश सुनिश्चित करे सरकार – शैलेन्द्र कुमार

धर्मेंद्र शाह 

2020-21 सत्र में छात्र-छात्राएं शिक्षा का अधिकार’ (RTE) का लाभ नहीं ले पाए हैं।आरटीई के तहत स्कूल में दाखिले से लेकर कई जरूरी जानकारी इस सत्र 2020-21 में साझा नही किए जाने छात्र-छात्राएं शिक्षा का अधिकार’ (RTE) का लाभ नहीं ले पाए और बच्चे प्रवेश से वंचित रह गए है। आरटीई अंतर्गत 3 से 7 वर्ष के सभी बच्चों को इस अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत बच्चों का नामांकन एल.के.जी., यू.के.जी. एवं कक्षा एक में बिना किसी शुल्क के प्रवेषित किया जाता है।


पिछड़ा शोषित समाज स्वयं सेवक संघ (PS-5) के जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार ने कहा कि

आजादी के बाद से ही विभिन्न नीतियों के साथ भारतीय सरकार का एक बड़ा उद्देश्य शिक्षा को बढ़ावा देना भी रहा है, जिसमें हम सभी ने टीवी चैनलों पर “पढ़ेगा इंडिया, तभी बढ़ेगा इंडिया” स्लोगन सुना है, किंतु शिक्षा को सभी वर्गों में समान बनाने के लिए संविधान में ‘शिक्षा का अधिकार’ (RTE) अधिनियम को अलग से जगह दी गई है, ताकि देश का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह पाए।


इस वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर अनुसूचित जाति,जनजाति, पिछड़ा वर्ग,अल्पसंख्यक,अनाथ,बेघर,विशेष आवश्यकता वाले बच्चे, ट्रांसजेंडर प्रवासी श्रमिकों के बच्चे आरटीई अधिनियम के तहत स्कूल में प्रवेश के लिए पात्र होते हैं। ऐसे होनहार बच्चों को इस सत्र 2020-21 में इस शिक्षा से वंचित रखा गया हैं। जो कि सरासर अन्याय है। आरटीई प्रवेश की अंतिम तिथि सामान्य रूप से हर वर्ष अप्रैल व मई, माह के दूसरे और अंतिम सप्ताह के बीच होती है जो इस सत्र 2020-21 में अभी तक नही किया गया है।

मुख्यमंत्री यदि आरटीई अधिनियम के तहत बच्चों का निःशुल्क प्रवेश सत्र 20202-21 में कराएं जाने की अति शीघ्र आदेशित नहीं करते है तो सामाजिक संगठनों के लोग बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।

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न्यूज़ डेस्क, उर्जांचल टाईगर

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