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बंदर को मारना पड़ा महंगा, आरोपी पहुंचा सलाखों के पीछे।

बैढ़न कार्यालय।।जंगली जीवो को मारना एक व्यक्ति को महंगा पड़ गया इस मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले का है।

क्या है मामला

मामला चितरंगी वन परिक्षेत्र का है जहां आरोपी संतोष केवट ने छोटकऊ केवट निवासी खटाई द्वारा पाले गये बंदर को पीट पीट कर हत्या कर दी। जब इस मामले की जानकारी वन विभाग को लगी तो वन विभाग के टीम मौके पर पहुंच कर पंचनामा तैयार कर आरोपीगण के विरूद्ध वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा 29,39,49, 51,57 का अपराध पंजीबद्ध कर आरोपीगण को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ,देवसर के न्यायालय में पेश किया गया।

बंदर के संरक्षित जीव होने का दिया हवाला

भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत वन्य प्राणियों को मारना आसान नहीं है। इसके लिए उक्त कानून के तहत पर्याप्त दंड की व्यवस्था की गई है किन्तु कानून को ताक में रखकर कुछ अपराधियों द्वारा इस कृत्य को अंजाम दिया गया। जब मामला प्रकाश में आया तो चितरंगी वन विभाग के टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुये आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया जहां से आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया।

एडीपीओ अजीत ने किया जमानत का किया विरोध

आरोपी के द्वारा न्यायालय के समक्ष जमानत की अर्जी प्रस्तुत की गई। शासन की तरफ से सहायक अभियोजन अधिकारी अजीत कुमार सिंह द्वारा न्यायालय के समक्ष जमानत का घोर विरोध करते हुए अपनी दलील में कहा कि भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, के बंदर उक्त अधिनियम की अनुसूची 1 के तहत एक संरक्षित जीव है। आगे श्री सिंह द्वारा कहा गया कि संरक्षित वन्यजीव की हत्या एकदम घॄणतम अपराध है आरोपीगण को जमानत का लाभ दिया जाना न्यायोचित नहीं होगा। श्री सिंह की दलील को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने आरोपी की जमानत खारिज कर उन्हें जेल भेज दिया।

ऐसे अपराध के लिए सज़ा क्या है?

उन अपराधों के लिए जिसमें वन्य जीव (या उनके शरीर के अंश)— जो कि इस अधिनियम की सूची 1 या सूची 2 के भाग 2 के अंतर्गत आते हैं— उनके अवैध शिकार, या अभ्यारण या राष्ट्रीय उद्यान की सीमा को बदलने के लिए दण्ड तथा जुर्माने की राशि बढ़ा दी गई है। अब कम से कम कारावास 3 साल का है जो कि 7 साल की अवधि के लिए बढ़ाया भी जा सकता है और कम से कम जुर्माना रु 10,000- है। दूसरी बार इस प्रकार का अपराध करने पर यह दण्ड कम से कम 3 साल की कारावास का है जो कि 7 साल की अवधि के लिए बढ़ाया भी जा सकता है और कम से कम जुर्माना रु 25,000/- है।

अब्दुल रशीद

Abdul Rashid is a well-known Journalist, Political Analyst and a Columnist on national issue. Cont.No.-7805875468, Email - editor@urjanchaltiger.in

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