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गांधी जयंती : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी मानवता के लिए कल्याणकारी उपहार।

आज पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 152 वीं जयंती मना रहा है। 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में इस महात्मा का जन्म हुआ। गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास था। उनके पिताजी का नाम करमचंद गांधी और माता जी का नाम पुतलीबाई था। इस प्रकार उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनके पिताजी राजकोट के दीवान थे। उनकी मां पुतलीबाई एक धार्मिक महिला थी।

बापू के जीवन पर अपनी मां के विचारों का गहरा प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अहिंसा, आत्म शुद्धि और शाकाहार को अपने जीवन का महत्वपूर्ण अंग बना लिया था। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद वे कानून की पढ़ाई करने के लिए लंदन गए। और बैरिस्टर की डिग्री हासिल की। परंतु वकालत करने के बजाय उन्होंने अपना पूरा जीवन देश के नाम समर्पित कर दिया।

अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी देश को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद कराया। देश को आजादी दिलाने के लिए उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ कई आंदोलन किए ।असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, चंपारण सत्याग्रह, दांडी सत्याग्रह, दलित आंदोलनआदि। जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी। और अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

गांधीजी हमेशा सत्य अहिंसा के रास्ते पर चलें। इसलिए 2 अक्टूबर को पूरे विश्व में “अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस” मनाया जाता है। उन्होंने समाज में फैली बुराइयों व भेदभाव का सदैव विरोध किया। और नारी सशक्तिकरण के लिए आवाज उठाई।


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हम सब प्यार से उन्हें “बापू” कह कर बुलाते हैं। बापू का अर्थ गुजराती में बाप यानी पिता होता है। बापू के विचार और आदर्श जन्म से ही महात्मा की तरह थे। लेकिन वास्तविक तौर पर उन्हें “महात्मा” की उपाधि रविंद्र नाथ टैगोर ने दी। सबसे पहले रविंद्र नाथ टैगोर ने ही उन्हें महात्मा कह कर संबोधित किया था। लेकिन कुछ इतिहासकारों का मानना है कि सन 1915 में राजवैद्य जीवनराम कालिदास ने उन्हें “महात्मा” कह कर संबोधित किया था।

इसी प्रकार गांधी जी को पूरे जीवन काल में कई उपाधियों से सम्मानित किया गया। कोई उन्हें बापू कहता है, कोई महात्मा, तो कोई “साबरमती का संत”। गांधी जी का पूरा जीवन ही हम सबके लिए उदाहरण है। उनके सिद्धांतों व आदर्शों से हमें प्रेरणा मिलती है।

गांधी जी हमारे राष्ट्रपिता है। उन्हें “राष्ट्रपिता” की उपाधि देने वाले पहले व्यक्ति नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे। 4 जून 1944 को सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर रेडियो पर प्रसारित संदेश के दौरान उन्हें “राष्ट्रपिता” कह कर संबोधित किया था। इसके इसके बाद 6 जुलाई 1944 को नेताजी ने दोबारा सिंगापुर रेडियो से प्रसारित संदेश में उन्हें राष्ट्रपिता कह कर संबोधित किया।बाद में भारत सरकार ने भी उन्हें राष्ट्रपिता की उपाधि से सम्मानित किया।

गांधी जी ने अपने जीवन का अंतिम समय साबरमती आश्रम में व्यतीत किया। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।


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पूरी दुनिया बापू को सत्य अहिंसा का पुजारी और शांति का दूत मानती है। तो आइए आज बापू की 152 वी जयंती पर हम उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। हम यहां पर गांधीजी के कुछ विचार प्रस्तुत कर रहे हैं। जो उन्होंने अपने जीवन काल में कहे थे।

धैर्य का छोटा हिस्सा भी एक टन उपदेश से बेहतर है। 
शक्ति शारीरिक क्षमता से नहीं आती है। एक अदम्य इच्छा शक्ति से आता है।
पहले वह आपकी उपेक्षा करेंगे, उसके बाद आपपे हसंगे, उसके बाद आपसे लड़ाई करेंगे, उसके बाद आप जीत जायेंगे।
व्यक्ति अपने विचारों के सिवाय कुछ नहीं है। वह जो सोचता है, वह बन जाता है।
एक आंख के लिए दूसरी आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देगी।

 

शबाना परवीन

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