मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश उपचुनाव : भाजपा विष से अमृत छानकर पी गई।

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मध्यप्रदेश में दो साल के सियासी उतार-चढ़ाव के बाद हुए उपचुनाव में 28 में से 19 सीटें जीतकर भाजपा 107 से 126 सीटों पर पहुँच कर जादुई आंकड़ा 115 से 11 ज्यादा सीटें हासिल कर ली है। उपचुनाव में जीत से यह साफ हो गया के कांग्रेस के तमाम आरोप प्रत्यारोप को खारिज कर मध्यप्रदेश की जनता ने शिवराज सिंह चौहान के वायदों और दावों पर विश्वास जताया है।


उपचुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट में लिखा,

” यह कांग्रेस के झूठ, फ़रेब, दम्भ और अहंकार की पराजय है। सत्य परेशान हो सकता है, किंतु पराजित नहीं। कांग्रेस के नेताओं ने समाज के प्रत्येक वर्ग का अपमान किया। प्रदेश के लोगों का विश्वास कांग्रेस ने तोड़ा, उनके मान-सम्मान और स्वाभिमान को ठेस पहुँचाई, लोगों ने उनसे बदला ले लिया। ”


मध्यप्रदेश के उपचुनाव को भाजपा जीत गई लेकिन कांग्रेस क्यों हार गई यह सवाल मौजूदा समय में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी सवाल का जवाब आने वाले समय में राज्य की सियासत का रुख तय करेगी ?

दरअसल,कांग्रेस के हाईकमान ने मध्यप्रदेश में पूरा उपचुनाव कमलनाथ के भरोसे लड़ा। कमलनाथ ने ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को सड़क पर उतरने के लिए कहा था, उसके बाद ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक विध्यायक, सिंधिया के साथ बीजेपी में शामिल हो गए। और सत्ता परिवर्तन हो गाया था। पूरे उपचुनाव में कांग्रेस सिंधिया और उनके समर्थक को टार्गेट करते रहें और भाजपा विष से अमृत छानकर पी गई।

दरअसल,मध्य प्रदेश में कांग्रेस जनता, मीडिया और अपने नेताओं तीनों से समान दूरी बना कर रखती दिखाई पड़ती है, जो की काफी हद तक सच भी है। प्रदेश स्तर के नेता तो दूर जिले के भी नेताओं में यह गुण साफ़ झलकता है। सबकुछ ऐसा ही चलता रहा तो प्रदेश में होने वाले निकाय चुनाव का परिणाम भी ऐसा आए, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता।

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अब्दुल रशीद

Abdul Rashid is a well-known Journalist, Political Analyst and a Columnist on national issue. Cont.No.-7805875468, Email - editor@urjanchaltiger.in

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