Toll Tax : गया जमाना Fastag का ! अब ऐसे कटेगा टोल टैक्स।

केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा अब टोल प्लाजा पर वाहनों की टैक्स कार्य प्रणाली में परिवर्तन किया जा रहा है। जिसमें नंबर प्लेट की पहचान कर वाहन मालिक के सीधे खाते से ऑटोमेटिक टोल टैक्स वसूला जाएगा। टोल प्लाजा की जगह ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर लगाने के लिए प्रायोगिक परियोजनाओं पर केंद्र सरकार काम कर रही है।Traffic Rules: Helmet पहने होने के बावजूद कटेगा 2000 रुपए का चालान

जिससे सरकार का मानना है कि टोल प्लाजा पर वाहनों का जितना हाइवे पर वहन होगा उतना ही शुल्क लगेगा और प्लाजा पर वाहनों की भीड़ भी घटेगी। केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने सोमवार को इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) की 19वीं इंडो-यूएस इकोनॉमिक को सबमिट किया और मंगलवार को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस परियोजना का प्रारम्भ होने से वाहन मालिकों के सीधे बैंक खातों से शुल्क की कटौती की जा सकेगी।

टोल टैक्स toll tax में सालाना 15,000 करोड़ रुपये की हुई बढ़ोतरी

केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari)

माइंडमाइन शिखर सम्मेलन में नितिन गडकरी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की टोल टैक्स में Fastag की शुरुआत के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की सालाना 15,000 करोड़ रुपये आय में बढ़ोतरी हुई है। नितिन गडकरी ने जिसके बारे में विस्तार से जानकारी दिये बिना कहा की ”हम अब ऑटोमोबाइल नंबर प्लेट तकनीक या ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर कैमरा पेश करने जा रहे हैं। जिसके बाद से किसी टोल प्लाजा की जरूरत नहीं होगी।


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आपको ज्ञात हो की पिछले वर्ष 2018-19 में औसत प्रतीक्षा समय टोल प्लाजा पर वाहनों का आठ मिनट था। जो की फास्टैग की शुरुआत के साथ 2020-21 और 2021-22 में वाहनों के लिए औसत प्रतीक्षा समय घटकर 47 सेकंड हो गया। विशेष रूप से घनी आबादी वाले शहरों में प्रतीक्षा समय में काफी सुधार देखा गया है। इसके बावजूद भी टोल प्लाजा पर कुछ देरी होती है।

केंद्र सरकार के पास दो विकल्प

पिछले महीने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सरकार द्वारा अब दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। पहला विकल्प उपग्रह की तरह टोल प्रणाली है जिससे कार में जीपीएस होगा और टोल सीधे यात्री के बैंक खाते से लिया जाएगा और दूसरा विकल्प नंबर प्लेट पहचान के जरिए शुल्क लेना है। उन्होंने इन विकल्पों के बारे में कहा, ‘हम उपग्रह का इस्तेमाल करते समय फास्टैग की जगह जीपीएस लगाने की प्रक्रिया में हैं, वहीं देश में नंबर प्लेट के जरिए शुल्क पर भी अच्छी तकनीक उपलब्ध है।

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