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स्कूल की बदहाली दिखाने के बाद, बांकुड़ा में CJP सदस्य अब्दुल के पिता की मौत !

बांकुड़ा के करिसुंबा गांव में CJP प्रतिनिधिमंडल ने मृतक के परिवार से मुलाकात की।

बांकुड़ा के करिसुंबा गांव में CJP सदस्य के पिता की मौत का मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। CJP ने जहां बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए चार मांगें रखी हैं, वहीं बीजेपी ने घटना से अपना संबंध खारिज किया है। पुलिस द्वारा की जा रही जांच और आगे की कार्रवाई से मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

करिसुंबा गांव पहुंचे आशुतोष रांका

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के करिसुंबा गांव में CJP सदस्य शेख अब्दुल हाफिज के पिता की मौत को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। सोमवार को CJP के राष्ट्रीय सह-संयोजक आशुतोष रांका गांव पहुंचे और मृतक के परिवार से मुलाकात की।

परिवार से बातचीत के बाद रांका ने घटना को लेकर बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, बीजेपी की ओर से घटना से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया गया है।

स्कूल के सोशल ऑडिट को लेकर हुआ विवाद, CJP का आरोप

आशुतोष रांका के मुताबिक, शेख अब्दुल हाफिज किसी राजनीतिक कार्यक्रम के लिए नहीं, बल्कि सरकारी स्कूल का सोशल ऑडिट करने और उसकी स्थिति सुधारने की बात करने गए थे।

रांका ने आरोप लगाया कि इसके बाद अब्दुल के घर पर हमला किया गया। उन्होंने कहा कि अब्दुल को बचाने पहुंचे उनके पिता के साथ भी मारपीट हुई और बाद में उनकी मौत हो गई।

रांका ने कहा,

“अब्दुल वोट मांगने तो नहीं गया था। अब्दुल स्कूल ठीक कराने की बात करने गया था।”

CJP नेता ने दावा किया कि संगठन के प्रतिनिधिमंडल के अब्दुल से मिलने की जानकारी सामने आने के बाद उसी स्कूल में अचानक सुधार का काम शुरू कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर स्कूल को दो दिन में सुधारा जा सकता था तो पहले ऐसा क्यों नहीं किया गया।

CJP ने बीजेपी पर लगाए आरोप

आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि स्कूल की समस्या का समाधान करने के बजाय बीजेपी से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर हिंसा का रास्ता अपनाया।

उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ CJP की जिम्मेदारी नहीं है। उनके मुताबिक, देश में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति के साथ संगठन खड़ा है।

रांका ने यह भी कहा कि CJP से जुड़े युवा हिंसा और धमकी से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि अब्दुल और उनके परिवार के साथ अस्पताल तथा पुलिस थाने में जिस तरह का व्यवहार हुआ, उसकी भी जांच की जरूरत है।

बंगाल सरकार के सामने चार मांगें

परिवार से मुलाकात के बाद CJP ने पश्चिम बंगाल सरकार के सामने चार मांगें रखी हैं। रांका के मुताबिक, पहली प्रमुख मांग FIR में दर्ज करीब 10 अज्ञात आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की है।

10 दिनों में अज्ञात आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग

CJP ने मांग की है कि FIR में दर्ज अज्ञात आरोपियों की पहचान कर उन्हें अगले 10 दिनों के भीतर गिरफ्तार किया जाए। संगठन ने आरोपियों के खिलाफ मामले में लागू सभी संबंधित धाराएं लगाने की भी मांग की है।

पुलिस की भूमिका की स्वतंत्र जांच

दूसरी प्रमुख मांग इंदास पुलिस थाने की भूमिका की स्वतंत्र जांच से जुड़ी है। रांका ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में थाने के कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठते हैं।

उन्होंने कोर्ट के आदेश से एक स्वतंत्र कमेटी गठित कर पुलिस की भूमिका की जांच कराने की मांग की है।

रांका ने कहा कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, CJP इस मामले को उठाता रहेगा।

जनिए, अब तक पुलिस ने क्या कार्रवाई की ?

मामले में पुलिस की जांच जारी है। मृतक की पत्नी हसीना बेगम ने रविवार को इंदास पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में पांच लोगों के नाम बताए गए हैं। साथ ही आरोप लगाया गया है कि करीब 10 से 15 लोगों ने घर पर हमला किया था।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हमले में और कौन लोग शामिल थे और घटना के पीछे पूरी वजह क्या थी।

पीड़ित परिवार के घर पर सुरक्षा भी तैनात की गई है।

BJP ने घटना से संबंध से किया इनकार

बीजेपी की ओर से घटना से पार्टी का कोई संबंध होने से इनकार किया गया है। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने कहा कि घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने पुलिस से यह भी जांच करने को कहा कि घटना का संबंध दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन से था या नहीं।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, दर्ज FIR में बीजेपी का नाम नहीं है और पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

मामले की जांच पर टिकी नजर

फिलहाल इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। एक तरफ CJP ने आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की है, वहीं बीजेपी ने घटना से किसी संबंध से इनकार किया है।

अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि हमले में कौन-कौन शामिल था, घटना की वास्तविक वजह क्या थी और मृतक की मौत से जुड़े सभी तथ्यों की कड़ी क्या है।

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